Wholesale Price Index Wpi Inflation Rises For September 2020 Says Government Of India – सितंबर में बढ़कर 1.32 फीसदी पर पहुंची थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

Updated Wed, 14 Oct 2020 12:44 PM IST





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सरकार ने सितंबर माह के थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (WPI) के आंकड़े जारी कर दिए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 1.32 फीसदी हुई, जो अगस्त में 0.16 फीसदी थी। वहीं जुलाई में यह आंकड़ा नकारात्मक 0.58 फीसदी था और जून में यह नकारात्मक 1.81 फीसदी था। सितंबर 2019 में देश की थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (WPI) 0.33 फीसदी थी।

सितंबर में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 6.92 फीसदी रही, जो अगस्त में 4.07 फीसदी थी। ईंधन और बिजली की बात करें, तो सितंबर में यह नकारात्मक 9.54 फीसदी रही। अगस्त में यह आंकड़ा नकारात्मक 9.68 था। इस दौरान विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति 1.61 फीसदी रही, जे अगस्त में 1.27 फीसदी हो गई थी। प्राथमिक उत्पादों की मुद्रास्फीति अगस्त में 1.60 फीसदी थी। लेकिन सितंबर में यह 5.10 फीसदी हो गई।

 

भारत में महंगाई दर बाजारों में सामान्य तौर पर कुछ समय के लिए वस्तुओं के दामों में उतार-चढ़ाव महंगाई को दर्शाती है। जब किसी देश में वस्तुओं या सेवाओं की कीमतें अधिक हो जाती हैं, तो इसको महंगाई कहते हैं। उत्पादों की कीमत बढ़ने से परचेजिंग पावर प्रति यूनिट कम हो जाती है। थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर ही वित्तीय और मौद्रिक नीतियों के फैसले लिए जाते हैं।

सरकार ने सितंबर माह के थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (WPI) के आंकड़े जारी कर दिए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 1.32 फीसदी हुई, जो अगस्त में 0.16 फीसदी थी। वहीं जुलाई में यह आंकड़ा नकारात्मक 0.58 फीसदी था और जून में यह नकारात्मक 1.81 फीसदी था। सितंबर 2019 में देश की थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (WPI) 0.33 फीसदी थी।

सितंबर में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 6.92 फीसदी रही, जो अगस्त में 4.07 फीसदी थी। ईंधन और बिजली की बात करें, तो सितंबर में यह नकारात्मक 9.54 फीसदी रही। अगस्त में यह आंकड़ा नकारात्मक 9.68 था। इस दौरान विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति 1.61 फीसदी रही, जे अगस्त में 1.27 फीसदी हो गई थी। प्राथमिक उत्पादों की मुद्रास्फीति अगस्त में 1.60 फीसदी थी। लेकिन सितंबर में यह 5.10 फीसदी हो गई।

 

भारत में महंगाई दर बाजारों में सामान्य तौर पर कुछ समय के लिए वस्तुओं के दामों में उतार-चढ़ाव महंगाई को दर्शाती है। जब किसी देश में वस्तुओं या सेवाओं की कीमतें अधिक हो जाती हैं, तो इसको महंगाई कहते हैं। उत्पादों की कीमत बढ़ने से परचेजिंग पावर प्रति यूनिट कम हो जाती है। थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर ही वित्तीय और मौद्रिक नीतियों के फैसले लिए जाते हैं।

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