The funds received till 9:30 am under the National Pension System will be treated on the same day | NPS के तहत सुबह 9:30 बजे तक प्राप्त धन उसी दिन माना जाएगा निवेश, कट ऑफ टाइम में किया संशोधन

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नई दिल्ली8 मिनट पहले

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  • इससे पहले ये समय सीमा सुबह 8:30 बजे तक की थी
  • 1 अक्टूबर 2020 से PFRDA ने डी-रेमिट फीचर को रोल आउट किया था

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को लेकर बड़ा बदलाव किया है। अब एक ही दिन की नेट एसेट वैल्यू (NAV) के लिए डायरेक्ट रेमिटेंस (डी-रेमिट) के तहत कट ऑफ टाइम में संशोधन की घोषणा की गई है। अब ट्रस्टी बैंक द्वारा किसी भी बैंक कार्य दिवस (शनिवार, रविवार और छुट्टियों के अलावा) पर सुबह 9:30 बजे तक प्राप्त धन उसी दिन निवेश माना जाएगा। इससे पहले ये समय सीमा सुबह 8:30 बजे तक की थी। सुबह 9.30 बजे के बाद प्राप्त अंशदान का निवेश अगले कार्य दिवस में किया जाएगा।

अब तक बनीं 40 हजार से अधिक डी-रेमिट वर्चुअल आईडी
1 अक्टूबर 2020 से PFRDA द्वारा डी-रेमिट फीचर को रोल आउट करने के बाद से अब तक 40 हजार से अधिक डी-रेमिट वर्चुअल आईडी बनाए गए हैं। डी-रेमिट सुविधा के जरिए 11 नवंबर 2020 को 1.80 करोड़ रुपए का योगदान जमा किया गया है।

क्या है डी-रीमिट सुविधा?

  • डी-रेमिट सुविधा के तहत अब NPS ग्राहक अब पेंशन फंड नियामक PFRDA द्वारा हाल ही में शुरू की गई डी-रेमिट सुविधा के तहत अपने बैंक खातों से सीधे अपने NPS खातों में धन हस्तांतरित कर सकते हैं। इस सुविधा के तहत, ग्राहक अपने निवेश के लिए एक ही दिन का NAV प्राप्त कर सकते हैं।
  • म्यूचुअल फंड सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की तरह NPS सब्सक्राइबर अपने बैंकिंग प्लेटफॉर्म के रिकरिंग ऑप्शन (आवर्ती विकल्प) का उपयोग करके अपने बैंक खाते से सीधे नियमित अंशदान कर सकते हैं।
  • डी-रेमिट सुविधा के तहत, NPS निवेशक NEFT/RTGS के माध्यम से सीधे अपने बैंक खातों से अपने NPS खातों में पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं और उसी दिन NAV प्राप्त कर सकते हैं। डी-रेमिट फीचर के माध्यम से न्यूनतम अंशदान राशि 500 ​​रुपए है।

कैसे ले सकते हैं इस सुविधा का लाभ?

  • NPS सब्सक्राइबर जिनके पास बैंकों की नेट बैंकिंग की सुविधा है, वे डी-रेमिट सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
  • डी-रेमिट मोड के माध्यम से योगदान करने के लिए खाते में लॉगइन करके पर्मानेंट रेमिटेंस अकाउंट नंबर (PRAN) से जुड़ी एक वर्चुअल आईडी बनानी होगी।
  • इसके बाद सब्सक्राइबर को अपने नेट बैंकिंग अकाउंट में लाभार्थी के तौर पर IFSC डिटेल्स के साथ वर्चुअल आईडी जोड़नी होगी।
  • आखिर में सब्सक्राइबर्स जरूरत पड़ने पर एनपीएस खाते में फंड रिमिटिंग शुरू कर सकता है।

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