Mahaparva Chhath Of Sun Worship From Today – सूर्य उपासना का महापर्व छठ आज से, आयोजन को लेकर अगर-मगर

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सूर्य उपासना का महापर्व छठ बुधवार से शुरू होगा। पंचांग के अनुसार 36 घंटे का यह महापर्व कार्तिक शुक्ल चतुर्थी (बुधवार) से शुरू होगा और कार्तिक शुक्ल सप्तमी को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ खत्म होगा। यह सूर्यदेव की आराधना का पर्व है, प्रात: काल में सूर्य की पहली किरण और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य देकर नमन किया जाता है। सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है।

पूर्वांचली छठ पूजा चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से व्रत शुरू करेंगे। छठ पूजा के दूसरे दिन खरना करेंगे। रात को प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती निर्जला उपवास पर रहेंगे। तीसरे दिन व्रती अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य देंगे। शनिवार को व्रति उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत को समाप्त करेंगे। फिर पारण करके व्रत को पूरा किया जाता है।

पंडित कौशल किशोर ने बताया कि सुख-समृद्धि तथा मनोकामनाओं की पूर्ति का यह त्योहार सभी समान रूप से मनाते हैं। पूर्वांचल निवासी खासतौर पर इस व्रत को करते हैं। छठ पूजा का आरंभ महाभारत काल से होता आ रहा है। सूर्य पुत्र कर्ण ने भी इस व्रत को किया था। छठ मईया सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। गंगा-यमुना या किसी भी पवित्र नदी या पोखर के किनारे पानी में खड़े होकर यह पूजा संपन्न की जाती है।
 
कार्यक्रम
नहाय खाय    :    18 नवंबर
खरना    :    19 नवंबर
अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य    :    20 नवंबर
उगते हुए सूर्य को अर्घ्य    :    21 नवंबर

ऐसे करें नहाय खाय पूजन
छठ पूजा का पहला दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी ‘नहाय-खाय’ के रूप में मनाया जाता है। घर की सफाई कर पवित्र बना लिया जाता है। इसके पश्चात छठ व्रती स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करते हैं। घर के सभी सदस्य व्रती के भोजनोपरांत ही भोजन ग्रहण करते हैं। भोजन के रूप में कद्दू-चने की दाल और पका हुआ चावल ग्रहण किया जाता है।

दिल्ली में सार्वजनिक छठ पूजा कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाए जाने के खिलाफ मंगलवार को दिल्ली भाजपा पूर्वांचल मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास पर प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से छठ महापर्व आयोजन के लिए अनुमति देने की मांग की।

दक्षिणी निगम सदन की बैठक में छठ के प्रस्ताव को मिली मंजूरी
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम सदन की मंगलवार को आयोजित हुई बैठक में छठ पूजा के आयोजन के लिए प्रस्ताव पास कर दिया गया। वहीं, नेता सदन नरेंद्र चावला ने निगमायुक्त से छठ पर्व मनाने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।
नरेंद्र चावला ने कहा कि राजधानी में अधिकांश लोग छोटे मकानों में रहते हैं, जहां जगह न होने की वजह से लोग छठ पूजा नहीं कर पाते हैं। यही वजह है कि पूर्वांचल के लोग छठ घाटों पर पहुंच पूजा करते हैं। ऐसे में दिल्ली सरकार से आग्रह है कि वह जल्द से जल्द इस प्रस्ताव पर विचार कर छठ पर्व मनाने की अनुमति प्रदान करे। 

सूर्य उपासना का महापर्व छठ बुधवार से शुरू होगा। पंचांग के अनुसार 36 घंटे का यह महापर्व कार्तिक शुक्ल चतुर्थी (बुधवार) से शुरू होगा और कार्तिक शुक्ल सप्तमी को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ खत्म होगा। यह सूर्यदेव की आराधना का पर्व है, प्रात: काल में सूर्य की पहली किरण और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य देकर नमन किया जाता है। सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है।

पूर्वांचली छठ पूजा चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से व्रत शुरू करेंगे। छठ पूजा के दूसरे दिन खरना करेंगे। रात को प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती निर्जला उपवास पर रहेंगे। तीसरे दिन व्रती अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य देंगे। शनिवार को व्रति उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत को समाप्त करेंगे। फिर पारण करके व्रत को पूरा किया जाता है।

पंडित कौशल किशोर ने बताया कि सुख-समृद्धि तथा मनोकामनाओं की पूर्ति का यह त्योहार सभी समान रूप से मनाते हैं। पूर्वांचल निवासी खासतौर पर इस व्रत को करते हैं। छठ पूजा का आरंभ महाभारत काल से होता आ रहा है। सूर्य पुत्र कर्ण ने भी इस व्रत को किया था। छठ मईया सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। गंगा-यमुना या किसी भी पवित्र नदी या पोखर के किनारे पानी में खड़े होकर यह पूजा संपन्न की जाती है।

 
कार्यक्रम
नहाय खाय    :    18 नवंबर
खरना    :    19 नवंबर
अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य    :    20 नवंबर
उगते हुए सूर्य को अर्घ्य    :    21 नवंबर

ऐसे करें नहाय खाय पूजन
छठ पूजा का पहला दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी ‘नहाय-खाय’ के रूप में मनाया जाता है। घर की सफाई कर पवित्र बना लिया जाता है। इसके पश्चात छठ व्रती स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करते हैं। घर के सभी सदस्य व्रती के भोजनोपरांत ही भोजन ग्रहण करते हैं। भोजन के रूप में कद्दू-चने की दाल और पका हुआ चावल ग्रहण किया जाता है।


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 प्रतिबंध के खिलाफ मुख्यमंत्री आवास पर प्रदर्शन

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