Know How Indian Forces Destroyed Jaish Attack In Nagrota Encounter – नगरोटा एनकाउंटरः आतंकी मसूद अजहर के भाई ने कुछ इस तरह से रची थी कश्मीर को दहलाने की साजिश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 21 Nov 2020 09:44 PM IST

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जम्मू कश्मीर के नगरोटा के पास बान टोल प्लाजा पर गुरुवार की सुबह मारे गए आतंकी संगठन जैशे मोहम्मद के चारों आतंकी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी मौलाना मसूद अजहर के भाई मुफ्ती रऊफ असगर के इशारे पर काम कर रहे थे।

सूत्रों के अनुसार रऊफ ने भारतीय सीमा के पास पाकिस्तान के जैश के शकरगढ़ कैंप से चार जिहादियों का चयन किया था। आतंकी हमले की योजना बनाने के लिए जैश में एक अन्य आतंकवादी काजी तरार को भी असगर के साथ सौंपा गया था।

सूत्रों ने बताया कि बहावलपुर में जैश मुख्यालय में एक बैठक भी हुई और इसमें अब्दुल रउफ असगर, काजी तरार और आईएसआइ अधिकारियों समेत जैश के आतंकी नेटवर्क के मौलाना अबु जुंदाल और मुफ्ती तौसीफ भी शामिल थे।

आतंकवादियों को दी गई थी खास ट्रेनिंग
चारों आतंकवादियों ने खतरनाक आत्मघाती हमले का प्रशिक्षण प्राप्त किया और कश्मीर घाटी को दहलाने के लिए गोलाबारी से लेकर बम चलाने तक की ट्रेनिंग ली। इस दौरान इन्हें अधिक से अधिक आक्रामक बनाने की कोशिश की गई।

कुछ इस तरह से दाखिल हुए भारतीय सीमा में
जैश के आतंकवादियों ने सांबा सेक्टर में भारतीय सीमा में घुसने के लिए नदी के किनारे के क्षेत्र में बने सुरंग का प्रयोग किया और जम्मू संभाग के कठुआ की ओर सांबा से जाटवाल छह किलोमीटर दूर एक ट्रक में ले जाया गया। भारतीय सीमा में घुसने के बाद वे कश्मीर में जैश के ऑपरेशनल कमांडर मोहम्मद अशगर खान के संपर्क में थे। 

जीपीएस डिवाइस से साजिश का पर्दाफाश
आतंकियों के साथ मुठभेड़ इत्तेफाक से नहीं हुई थी। यह खुफिया सूचना आधारित ऑपरेशन था। सुरक्षाबलों का मानना है कि सीमापार से आए आतंकी एक बड़े हमले को अंजाम देने वाले थे।  इस घटना से संबंधित जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) डिवाइस के शुरुआती आंकड़ों से और चारों आतंकवादियों के पास मिले मोबाइल फोन से पता चलता है कि वे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के ऑपरेशनल कमांडर मुफ्ती रऊफ असगर और कारी जरार के संपर्क में थे। इनका मकसद कश्मीर घाटी में बड़ा हमला करना था।

ट्रक ड्राइवर  के भागने की कोशिश के बाद मुठभेड़ शुरू
गुरुवार सुबह 4 बजकर 50 मिनट के आसपास आतंकियों को ले जा रहे ट्रक को जब रोका गया तो पूछताछ करने पर ड्राइवर डर गया और कूदकर भागने लगा। पुलिस की टीम पर ट्रक के अंदर से ताबड़तोड़ फायरिंग हुई और फिर जवाबी कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकवादी मारे गए। उनके पास से 11 एके-47 राइफल और 3 पिस्तौल सहित भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया है। हर आतंकवादी कम से कम 3 एके-47 राइफल ले जा रहा था।

 

जम्मू कश्मीर के नगरोटा के पास बान टोल प्लाजा पर गुरुवार की सुबह मारे गए आतंकी संगठन जैशे मोहम्मद के चारों आतंकी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी मौलाना मसूद अजहर के भाई मुफ्ती रऊफ असगर के इशारे पर काम कर रहे थे।

सूत्रों के अनुसार रऊफ ने भारतीय सीमा के पास पाकिस्तान के जैश के शकरगढ़ कैंप से चार जिहादियों का चयन किया था। आतंकी हमले की योजना बनाने के लिए जैश में एक अन्य आतंकवादी काजी तरार को भी असगर के साथ सौंपा गया था।

सूत्रों ने बताया कि बहावलपुर में जैश मुख्यालय में एक बैठक भी हुई और इसमें अब्दुल रउफ असगर, काजी तरार और आईएसआइ अधिकारियों समेत जैश के आतंकी नेटवर्क के मौलाना अबु जुंदाल और मुफ्ती तौसीफ भी शामिल थे।

आतंकवादियों को दी गई थी खास ट्रेनिंग
चारों आतंकवादियों ने खतरनाक आत्मघाती हमले का प्रशिक्षण प्राप्त किया और कश्मीर घाटी को दहलाने के लिए गोलाबारी से लेकर बम चलाने तक की ट्रेनिंग ली। इस दौरान इन्हें अधिक से अधिक आक्रामक बनाने की कोशिश की गई।

कुछ इस तरह से दाखिल हुए भारतीय सीमा में
जैश के आतंकवादियों ने सांबा सेक्टर में भारतीय सीमा में घुसने के लिए नदी के किनारे के क्षेत्र में बने सुरंग का प्रयोग किया और जम्मू संभाग के कठुआ की ओर सांबा से जाटवाल छह किलोमीटर दूर एक ट्रक में ले जाया गया। भारतीय सीमा में घुसने के बाद वे कश्मीर में जैश के ऑपरेशनल कमांडर मोहम्मद अशगर खान के संपर्क में थे। 

जीपीएस डिवाइस से साजिश का पर्दाफाश
आतंकियों के साथ मुठभेड़ इत्तेफाक से नहीं हुई थी। यह खुफिया सूचना आधारित ऑपरेशन था। सुरक्षाबलों का मानना है कि सीमापार से आए आतंकी एक बड़े हमले को अंजाम देने वाले थे।  इस घटना से संबंधित जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) डिवाइस के शुरुआती आंकड़ों से और चारों आतंकवादियों के पास मिले मोबाइल फोन से पता चलता है कि वे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के ऑपरेशनल कमांडर मुफ्ती रऊफ असगर और कारी जरार के संपर्क में थे। इनका मकसद कश्मीर घाटी में बड़ा हमला करना था।

ट्रक ड्राइवर  के भागने की कोशिश के बाद मुठभेड़ शुरू
गुरुवार सुबह 4 बजकर 50 मिनट के आसपास आतंकियों को ले जा रहे ट्रक को जब रोका गया तो पूछताछ करने पर ड्राइवर डर गया और कूदकर भागने लगा। पुलिस की टीम पर ट्रक के अंदर से ताबड़तोड़ फायरिंग हुई और फिर जवाबी कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकवादी मारे गए। उनके पास से 11 एके-47 राइफल और 3 पिस्तौल सहित भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया है। हर आतंकवादी कम से कम 3 एके-47 राइफल ले जा रहा था।

 

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