GST Collection October 2020 Vs 2019 Update; India’s Economy Showing Signs Of Improvement | जीएसटी कलेक्शन,ऑटो बिक्री, और फ्यूल डिमांड समेत पांच इंडिकेटर्स से समझिए कैसे सुधर रही है अर्थव्यवस्था ?

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नई दिल्ली8 मिनट पहले

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  • अक्टूबर में बिजली की खपत 110.94 अरब यूनिट रही, जो अक्टूबर 2019 की तुलना में 13.38% अधिक है
  • सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए बजट में जीएसटी कलेक्शन का लक्ष्य 13.8 लाख करोड़ रुपए रखा है

कोरोना संकट के बीच आर्थिक सुधारों के संकेत नजर आने लगे हैं। अक्टूबर में GST कलेक्शन पिछले साल की तुलना में 10% अधिक हुआ है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी डेटा के मुताबिक, अक्टूबर में GST कलेक्शन 1.05 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रहा है। इस साल फरवरी के बाद जीएसटी कलेक्शन का आंकड़ा पहली बार 1 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंचा है। इससे पहले सितंबर में भी जीएसटी कलेक्शन में बढ़त देखने को मिली थी। भारत सहित दुनिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्था में भी सुधार देखने को मिला है, जो कोरोना महामारी के कारण प्रभावित हुआ था।

अक्टूबर में क्यों बढ़ा जीएसटी कलेक्शन?
1. फेस्टिव सीजन –
त्योहारी सीजन में कारोबारी ग्रोथ और अनलॉक में दी जा रहीं रियायतों से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है। इससे कारोबार भी पटरी पर लौट रहा है। जानकारों ने बताया कि त्योहारी सीजन के कारण घरेलू मांग में तेजी आई है। इससे बाजार में भी रौनक लौटी है। इसी कारण अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी हुई है।
2. सितंबर में दूसरी तिमाही खत्म होने पर फाइल किए गए रिटर्न और बकाया टैक्स पेमेंट के वजह से भी कलेक्शन बढ़ा है।

80 लाख GSTR-3B रिटर्न फाइल हुए

वित्त मंत्रालय द्वारा डेटा के मुताबिक, 31 अक्टूबर 2020 तक कुल 80 लाख GSTR-3B रिटर्न फाइल किए गए हैं। इससे अक्टूबर में ग्रॉस जीएसटी रेवेन्यू 1,05,155 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। इसमें 19,193 करोड़ रुपए का CGST, 5,411 करोड़ रुपए का SGST और 52,540 करोड़ रुपए का IGST शामिल है। इसके अलावा 8,011 करोड़ रुपए सेस के जरिए मिले हैं। IGST में आयात किए गए सामान से वसूले गए 23,375 करोड़ रुपए भी शामिल हैं।

क्या जीएसटी कलेक्शन में आगे भी बढ़त देखने को मिलेगी?

हां, इसकी वजह फेस्टिव सीजन है। जानकारों का कहना है कि जीएसटी रेवेन्यू में बढ़त नवंबर महीने तक भी देखा जा सकता है। क्योंकि, इस दौरान लगभग सभी सेक्टर्स में अच्छी ग्रोथ देखने को मिलेगी। इस दौरान घरेलू मार्केट में खपत भी बढ़ेगी। डेटा के मुताबिक अक्टूबर में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में सामानों के इंपोर्ट से आने वाला रेवेन्यू 9% और डोमेस्टिक ट्रांजेक्शन से रेवेन्यू 11% बढ़ा है।

जीएसटी कलेक्शन में ये राज्य रहे सबसे अव्वल
अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन के लिहाज से टॉप-5 राज्यों में महाराष्ट्र सबसे ऊपर है। अक्टूबर, 2020 में महाराष्ट्र में जीएसटी कलेक्शन पिछले साल की तुलना में 5% बढ़कर 15,799 करोड़ रुपए रहा ,जो पिछले साल 15,106 करोड़ रुपए रहा था। लिस्ट में कर्नाटक और तमिलनाडु भी क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।

केंद्र सरकार को मिल सकती है राहत

जीएसटी कलेक्शन में बढ़त से केंद्र सरकार को राहत मिलेगी। क्योंकि राज्यों की 2.35 लाख करोड़ रुपए की GST भरपाई के लिए केंद्र सरकार 1.1 लाख करोड़ रुपए का लोन लेने वाली है। इससे पहले देश में कोरोना के कारण 25 मार्च से लॉकडाउन लागू कर दिया गया था। इस लॉकडाउन के कारण मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र में काफी गंभीर असर पड़ा था। ऐसा इसलिए क्योंकि सभी सेवाएं अस्थायी रूप से बंद हो गई थीं।

आर्थिक सुधार के 5 संकेत
1. बिजली खपत –
देश में बिजली की खपत में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर में बिजली की खपत 110.94 अरब यूनिट रही, जो अक्टूबर 2019 की तुलना में 13.38% अधिक है। पिछले साल अक्टूबर में यह आंकड़ा 97.84 अरब यूनिट था। खपत की बड़ी वजह औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों की ओर से बिजली की मांग बढ़ना है।

2. वाहन बिक्री में इजाफा – कोरोना संकट के बीच अक्टूबर माह में वाहनों की बिक्री में भारी इजाफा हुआ है। खासकर पैसेंजर गाड़ियों की मांग में तेजी दर्ज की गई है। सभी ऑटोमोबाइल कंपनियों ने घरेलू बाजार में अक्टूबर माह में कुल बिक्री में 18% की ग्रोथ दर्ज की है। इस साल अक्टूबर में कंपनियों ने कुल 3,33,759 कारें बेची हैं। जबकि पिछले साल इसी अवधि में 2,84,048 करें बेची थी।

3. फ्यूल मांग में बढ़ोतरी – अक्टूबर में डीजल की मांग भी प्री-कोविड स्तर के पार पहुंच गई है। डेटा के मुताबिक, डीजल की मांग पिछले साल की समान अवधि में 6.6% की ग्रोथ देखने को मिली है। डीजल की बिक्री अक्टूबर में साल भर के 57.9 लाख टन से बढ़कर 61.7 लाख टन पर पहुंच गई है।

4. टोल कलेक्शन में बढ़ोतरी – देश के हाईवे पर एक बार फिर कमर्शियल वाहनों की रफ्तार बढ़ी है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के रिसर्च फर्म द्वारा जारी डेटा के मुताबिक टोल कलेक्शन का आंकड़ा 1,941 करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया। यह आंकड़ा प्री-कोविड लेवल के पार पहुंच गया है।

5. ई-वे बिल –डेटा के मुताबिक 25 अक्टूबर तक ई-वे बिल जेनरेशन 5 करोड़ रुपए हो गया है। यह अक्टूबर 2019 से फरवरी 2020 के बीच जनरेट हुए 5.5 करोड़ रुपए के ई-वे बिल की तुलना में 109% अधिक है।

दुनियाभर में सुधार के संकेत

सितंबर तिमाही में यूरो जोन की इकोनॉमी में भी उम्मीद से बेहतर रिकवरी हुई है। यूरोपियन यूनियन (EU) के स्टेटस्टिक्स विभाग द्वारा जारी डेटा के मुताबिक सितंबर तिमाही में यूरो जोन की जीडीपी में 12.7% की ग्रोथ है। इससे पहले जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी में 11.8% की गिरावट देखने को मिली थी।

दूसरी ओर फ्रांस की इकोनॉमी में भी जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। शुक्रवार को राष्ट्रीय स्टेटस्टिक्स ऑफिस इन्सी (Insee) ने बताया कि सितंबर तिमाही में देश की जीडीपी 18.2% बढ़ी है। बता दें कि यूरो जोन में कुल 19 देश शामिल हैं, जो करेंसी के रूप में यूरो का उपयोग करते हैं।

बीते हफ्ते अमेरिका के कॉमर्स डिपार्टमेंट ने गुरुवार को कहा था कि जुलाई-सितंबर तिमाही में अमेरिका का एनुअलाइज्ड ग्रोथ रेट 33.1 फीसदी रहा। इससे पहले दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में अमेरिका की GDP में रिकॉर्ड 31.4 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी। उससे भी पहले पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में अमेरिका की GDP में 5 फीसदी गिरावट रही थी।

चालू वित्त वर्ष में उम्मीद से कम कलेक्शन की आशंका

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए बजट में जीएसटी कलेक्शन का लक्ष्य 13.8 लाख करोड़ रुपए रखा है। इस पर ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल ने अपनी इकोस्कोप रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 21 के लिए टोटल जीएसटी कलेक्शन 9 लाख करोड़ रुपए से 9.2 लाख करोड़ रुपए रह सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक इस साल कोरोना महामारी के चलते देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे अप्रैल-अक्टूबर के बीच जीएसटी कलेक्शन 20.2% नीचे फिसलकर 5.6 लाख करोड़ रुपए रहा।

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