BPCL’s EoI deadline ends Monday, several global giants may give a miss | BPCL के लिए बोली जमा करने का आज अंतिम दिन, रिलायंस इंडस्ट्रीज पर टिकी हैं सबकी निगाहें

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नई दिल्ली16 मिनट पहले

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कोरोनावायरस महामारी के कारण BPCL के निजीकरण की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।

  • तेल की कम कीमत और मांग के कारण बोली प्रक्रिया से बाहर रह सकती हैं कई ग्लोबल कंपनियां
  • BPCL की पूरी 52.98% हिस्सेदारी बेचना चाहती है सरकार, 50 हजार करोड़ रु. मिलने की उम्मीद

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) के निजीकरण के लिए आज बोली जमा करने के अंतिम दिन हैं। इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ब्रिटेन की BP और सऊदी अरामको समेत कई ग्लोबल एनर्जी कंपनी इस बोली प्रक्रिया से बाहर रह सकती हैं। सूत्रों का कहना है कि बाजार के मौजूदा हालातों को देखते हुए टोटल और रूस की कंपनी रॉसनेट भी बोली लगाने की इच्छुक नहीं हैं।

52.98% हिस्सेदारी बेचना चाहती है सरकार

BPCL में सरकार की 52.98% हिस्सेदारी है और सरकार इस पूरी हिस्सेदारी को बेचना चाहती है। हालांकि, तेल की कम कीमतों और कम मांग के कारण BPCL को अभी उम्मीद के मुताबिक बोलियां नहीं मिली हैं। BPCL देश की प्रॉफिट वाली सरकारी कंपनियों में शुमार है। इंडस्ट्री सूत्रों का कहना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और UAE की अबु धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) BPCL के लिए बोली लगा सकती हैं। ADNOC पहले से ही भारत में मौजूद है। यह एकमात्र कंपनी है जिसने भारतीय गुफाओं में क्रूड ऑयल स्टोर किया है।

चार बार बढ़ी है बोली लगाने की डेडलाइन

BPCL को बेचने की रणनीतिक प्रक्रिया कोरोनावायरस महामारी के कारण प्रभावित हुई है। इस कारण सरकार को बोली लगाने की डेडलाइन को चार बार बढ़ाना पड़ा है। इससे पहले बोली लगाने की अंतिम तिथि 30 सितंबर थी। उस समय भी कंपनी को उम्मीद के मुताबिक बोलियां नहीं मिली थीं। कोविड-19 के कारण बिक्री प्रक्रिया प्रभावित होने के बाद सरकार ने ई-मेल के जरिए बोली लगाने की मंजूरी दे दी थी।

सरकार को 50 हजार करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद

BPCL में पूरी 52.98% हिस्सेदारी की बिक्री सरकार को 50 हजार करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है। इससे सरकार को देश के फिस्कल डेफिसिट को सुधारने में मदद मिलेगी। कोविड-19 महामारी के आर्थिक प्रकोप के कारण फिस्कल डेफिसिट GDP का 8% होने की संभावना जताई जा रही है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश के जरिए 2.10 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य तय किया है। इसमें से सरकार अभी तक 6,138 करोड़ रुपए ही जुटा पाई है।

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